Zakat का बयान | जकात किसे दें और किसे नहीं

Zakat का बयान | जकात किसे दें और किसे नहीं

Zakat: इस बात पर इज्मा है कि हर साहिब ए निसाब आकिल और बालिग मुसलमान पर उसका जो बचत वाला माल है जिस पर साल गुजर जाए तो साल में एक दफा ज़कात देना उस पर फ़र्ज़ है इस पर सभी उम्मत का इज्मा है अहले सुन्नत का, अहले तशय्यो सब का इस पर इज्मा है कि यह ज़कात देनी है हर उस मुसलमान को जो साहिब ए निसाब हो चाहे साल में एक बार जब वो उस थ्रिशोल्ड पॉइंट को पार कर जाए जिसे हम निसाब कहते हैं

इस हवाले से अगर कोई ज़कात दे देगा तो माल का जोड़ना उस पर जायज़ हो जाएगा खजाना जोड़ना जायज़ हो जाएगा अगर वो रेगुलरली ज़कात देगा। नही तो यह माल सोना और चांदी उन लोगों के माथे और पीठ पर गरम करके दागे जाएंगे जो लोग ज़कात नही देते

सैय्यदना उमड़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि जो माल किसी पर नाज़िल हुआ और वह एक साल तक उसके पास जमा रहा तो उस पर ज़कात देना फ़र्ज़ हो जाएगा।
ज़कात रमज़ान के अलावा दिगर महीनों में भी दे सकते हैं लेकिन रमज़ान में ज़कात देना बेहतर है क्योंकि रमज़ान में सवाब ज्यादा मिलता है रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहिवसल्लम ने फरमाया की रमज़ान में एक अमल का सवाब 10 से लेकर 700 गुना ज्यादा मिलता है।

ज़कात (Zakat) किसे दी जाए?

ज़कात के लिए सबसे पहले हमारे रिश्तेदारों के गरीब, मिस्कीन और फकीर लोग हकदार है फिर हमारे आस पड़ोस के लोग हकदार है उसके बाद आपके मोहल्ले, शहर वाले और दूसरे लोग हकदार हैं इन्हें ज़कात देनी चाहिए आजकल लोग ज़कात अपने खानदान में देने के बजाए दूसरे लोगों को देते हैं और दूसरे शहरों में भेज देते हैं जो कि दुरुस्त नही है सबसे पहले हमे अपने रिश्तेदारों और आस पड़ोस में जरूरतमंद ढूंढना चाहिए फिर ही शहर से बाहर ज़कात देनी चाहिए।

जकात (Zakat) किसे नही देना चाहिए

औलाद अपने वालिदैन को ज़कात नही दे सकती है, इसी तरह शौहर बीवी को ज़कात नही दे सकता क्योंकि बीवी ज़िम्मा है, वालिदैन अपने नाबालिग बच्चों को ज़कात नही दे सकते हैं इसी तरह जो भी लोग आपकी किफ़ारत में रहते हैं आप उसे ज़कात नही दे सकते हैं

इसके अलावा गैर मुस्लिम, गनी और तंदुरुस्त इंसान, साहिबे इस्तेताद मरीज़, मय्यत के कफन दफन के लिए, क़ुरान की छपाई के लिए, मस्ज़िद के लिए ज़कात नही दी जा सकती है और नबी के खानदान जैसे सय्यद, हाशमी और कुरैशी खानदान को भी ज़कात देना हराम है।

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