Sabr ki ahmiyat – sabr kyon karna chahiye

Sabr ki ahmiyat - sabr kyon karna chahiye

मोमिन का सब्र – (sabr ki ahmiyat)

सब्र करने से सिफ़त और कसरत हममें पैदा होती है
सहीह मुस्लिम की रिवायत है अल्लाह के रसूल सल्ललाहो अलैहि वसल्लम सब्र के ताल्लुक से फरमाते हैं की सब्र एक रोशनी है
इसी तरह बुखारी की रिवायत है आप सल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया जो बचने की कोशिश करता है तो अल्लाह उसे बचाता है (जैसे कि कोई बुरे काम से बचने की कोशिश करता है, खराब काम से बचने की कोशिश करता है, गलत कामों से बचने की कोशिश करता है और सब्र करता है तो अल्लाह उसे बचाता है)
आगे आपने फरमाया जो बेनियाज़ी इख्तियार करता है तो अल्लाह उसे तौफीक देता है मतलब दूसरों के माल पर नजर नही रखता है अल्लाह से मांगता है आज हम अल्लाह से नही माँगते है बल्कि दूसरों के माल पर नज़र रखते हैं कि इसके पास तो बहुत पैसा है।
और फरमाया जो सब्र की कोशिश करें अल्लाह उसे सब्र अता करता है मतलब सब्र कोशिश करने से आता है

और जो भी तुम्हे सताता है चुप हो जाओ, जो भी तुम्हे परेशान करता है चुप हो जाओ और सब्र करो अल्लाह की कसम आप ऐसी ताकत बनोगे की पहाड़ भी रास्ता देगा “सब्र इंसान की सबसे बड़ी ताकत है”

और अल्लाह के रसूल आखिर में फरमाते है सब्र से बेहतरीन और वसी चीज़ किसी को नही मिली मतलब जिसको सब्र मिल गया उसको बेहतरीन चीज और बेहतरीन नेमत मिल गयी
और आज हम देखते हैं यही एक चीज है सब्र जो हम नही करते कोई मुसीबत आयी चीख रहे हैं चिल्ला रहे हैं, कोई मर गया रो रहे हैं और गैर शरई आमाल कर रहे हैं इसी तरह कोई चोरी की खबर आई तो रो रहे हैं, चीख रहे हैं! सब्र की बहुत जरूरत है याद रखिये और सब्र किसी को मिल जाये तो अल्लाह के रसूल ने फरमाया इससे बेहतर और वसी चीज किसी को नही मिली

सहीह मुस्लिम की हदीस है आप सल्लाहो अलैहि वसल्लम फरमाते हैं मोमिन के लिए कितनी अजीब बात है कि इसके सारे मामलात इसके हक में बेहतर है अगर इसे कोई खुशी पहुंचे तो वह शुक्र अदा करता है और यह इसके लिए खैर है और तकलीफ पहुंचे तो सब्र करता है और यह इसके लिए बेहतर है इसका मतलब है कि मोमिन के लिए गम और खुशी दोनों ही मामले बेहतर है खुशी के मामले में वह शुक्र अदा करता है और गम के मामले वह सब्र करता है जो कि दोनों ही बेहतर है।

सब्र इस्लाम का इस तरह जुज़ है जैसे जिंदगी का जुज़ पानी है पानी को जिंदगी से निकाल दो मौत!
हमने हर जानदार को पानी से बनाया पानी निकाल जाए तो मौत है dehydration जिसे कहते हैं तो इस्लाम में सब्र पानी की तरह है सब्र निकल गया तो इस्लाम कोई नही कोई और ही शक्ल है
सब्र वहां परखा जाता है जहां लोगों की तरफ से ज्यादती आये, लोगों की तरफ से तानों के तीर आये, जिल्लत के रवैये हो, बेइज्जती के रवैये हों, हसद के रवैये हों, बुग्ज़ के रवैये हों फिर सब्र करने वाला खुद को नही देखता अल्लाह को देखता है या अल्लाह में तेरे खातिर सब्र कर रहा हूँ

सब्र करने वालों का इनाम – (sabr ki ahmiyat)

अल्लाह तआला क़ुरआन में फरमाता है हम तुम्हे आजमाएंगे खोफ से, भूक से, जान-माल की कमी से, और फलों की कमी से! जो लोग इस पर सब्र करते हैं उन्हें खुशियां सुना दीजिये
सूरह अल-बक़राह 2 : 155 – 157

तो अल्लाह हमे आजमाता है खोफ से, भूक से, माल की कमी से! तो हमे इस पर सब्र करना चाहिए आज हम सब्र नही करते हैं सब्र कोशिश करने से आता है इसलिए हमें सब्र करने की कोशिश करनी चाहिए

आप सल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया मुसलमान को जब थकावट और बीमारी पहुँचती है या वो गमज़दा होता है हत्ता की एक काँटा भी इसे चुभता है तो अल्लाह इसके बदले में इसके गुनाहों को मिटा देता है
सहीह बुखारी, हदीस न. 5641-5642

इसका मतलब हम सब्र करेंगे तो सब्र करने से हमारे गुनाह माफ होंगे

और एक रिवायत में फरमाया ऐसे उनके गुनाह माफ होते हैं जैसे झाड़ के पत्ते झड़ते हैं
सहीह बुखारी, हदीस न. 5661

सब्र और शुक्र का गहरा ताल्लुक है हमे सब्र के साथ-साथ शुक्र भी करना चाहिए जिससे हमारी दुनिया और आख़िरत दोनों सँवर जाए।

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