क्या मय्यत सुनती और बोलती है? – Mayyat ka sunna aur bolna

क्या मय्यत सुनती और बोलती है? - Mayyat ka sunna aur bolna

मय्यत कलाम करती है – mayyat ka sunna sur bolna

Mayyat ka sunna aur bolna: आप सल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया की जब जनाजे को रखा जाता है और लोग मय्यत को अपने कंधों पर उठाकर चलते हैं तो वह मय्यत कलाम करती है, बोलती है अगर नेक मय्यत होती है तो कहती है कि मुझे जल्दी – जल्दी ले चलो क्योंकि क़बर उसके लिए जन्नत का बाग होती है और अगर बदकार मय्यत होती है तो कहती है मुझे कहाँ लेकर जा रहे हो?
उस मय्यत की आवाज इंसानों और जिन्नो के अलावा हर मख्लूक़ात सुनती है अगर इंसान सुन ले तो बेहोश हो जाये
सहीह बुखारी, 1380

आप सल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया की जब लोग मुर्दे को दफनाकर जा रहे होते हैं तो वह उनकी जूतों की आवाज को सुनता है वैसे अगर आप कैमरा लगायें तो वो आपको वैसे ही दिखाई देगा जैसे उसे लिटाया गया है क्योंकि वह पर्दे वाली ज़िंदगी है बर्ज़खी!
जूतों की आवाज क्यों सुनता है? अगर नेक होगा तो खुश होगा मेने इन पर भरोसा नही किया था और अगर बदकार होगा तो दुखी होग मेने इन पर भरोसा किया था और आज ये मुझे यहाँ डालकर चले गए।
सहीह बुखारी, 13

कबर के अंदर मय्यत का हाल – mayyat ka sunna aur bolna

फिर 2 फरिश्ते उसके पास आते हैं और कबर के 4 सवालात उससे पूछते हैं फिर उसे जहन्नम और जन्नत दिखाई जाती है और अगर वो मोमिन होता यही और सवालों के जवाब दे देता है तो उससे कहा जाता है कि ये जन्नत तेरा ठिकाना है उसे दोज़ख भी साथ दिखाई जाती है अगर तुझे जवाब न आता तो यहाँ तुझे जाना था और जब मुनाफिक से कबर में सवाल किये जाते हैं तो वह जवाब में यही कहता है “ला अदरी ला अदरी” मुझे कुछ मालूम नही में वही कहता था जो लोग कहा करते थे।
फिर फरिश्ते उससे चौथा सवाल करते हैं कि तूने खुद कोशिश करके हक हाँसिल करने की कोशिश क्यों नही की? या जो हक हाँसिल किया हुआ था उसके साथ चलने की कोशिश क्यों नही की?
फिर जब वह सवालों के जवाब नही दे पाता तो फरिश्ते उसके सर पर एक हथौड़ा मारते हैं और वह चीखता चिल्लाता है उसकी आवाज को जिन्नो और इंसानों के अलावा हर मखलूक सुनती है जिन और इंसान इस लिए नही सुनते की वो मुकललिफ है शरीयत के अल्लाह तआला ने उन पर पर्दा रखा हुआ है

हदीस में मुर्दों का सुन्ना साबित है अहले सुन्नत का इत्तेफाकी अकीदा है कि वो सुन्ना जायज़ है
इसी तरीके से जो बद्र वाले थे बद्र के कुँए में जिन काफिरों की लाशें डाली गई थी आप सल्लाहो अलैहि वसल्लम ने उनसे खताब किया तो हज़रते उमर ने पूछा कि या रसूलल्लाह सल्लाहो अलैहि वसल्लम यह तो मुर्दे हैं यह नही सुनते तो फरमाया तुमसे बेहतर सुनते हैं
बुखारी और मुस्लिम

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