Maidan e Mehshar में क्या होगा?

Maidan e Mehshar में क्या होगा?

नबी ने फरमाया की Maidan e Mehshar में जब जहन्नम को लाया जाए तो जहन्नम एक चीख मारेगी और उस चीख को सुनकर दुनिया के तमाम जिन्नो इंसान ज़मीन पर गिरेंगे और कहेंगे “या रब्बे नफ़्सी नफ़्सी या रब्बे नफ़्सी नफ़्सी” ( या अल्लाह मेरी जान बचा) उस दिन कोई किसी का सवाल नही करेगा किसी को अपने बाप बेटे का खयाल नही आएगा हर कोई सिर्फ अपनी जान ही बचाना चाहेगा उस वक़्त अरबों की तादाद में फरिश्ते वहां जमा होंगे और जहन्नम को लेकर आ रहे होंगे।

4 ऐसे अमल जिनका अजर अनलिमिटेड हैं।

Maidan e Mehshar में अम्बिया इकराम

हम और आप तो आम लोग हैं इसके अलावा वहाँ तमाम अम्बिया इकराम भी जमा होंगे वह भी यही कहेंगे “नफ़्सी नफ़्सी” इब्राहिम खलील जैसे कहेंगे या अल्लाह मेरी जान, ईसा अलैहिस्सलाम जैसी हस्ती कहेंगे या अल्लाह में अपनी माँ मरियम का भी सवाल नही करता मेरी जान बचा! आदम अलैहिस्सलाम से लेकर ईसा अलैहिस्सलाम तक नफ़्सी नफ़्सी, नूह अलैहिस्सलाम नफ़्सी नफ़्सी, याहया और जकरिया बाप बेटे हैं लेकिन नफ़्सी नफ़्सी, सुलैमान और दावूद बाप बेटे हैं लेकिन नफ़्सी नफ़्सी, यूसुफ और याकूब बाप बेटे हैं लेकिन नफ़्सी नफ़्सी, याकूब और इसहाक बाप बेटे हैं लेकिन नफ़्सी नफ़्सी, इसहाक और इब्राहिम बाप बेटे हैं लेकिन नफ़्सी नफ़्सी और इस्माइल और इब्राहिम बाप बेटे हैं लेकिन नफ़्सी नफ़्सी!
यह नबियों का हाल है उस वक़्त हमारा क्या हाल होगा।

Maidan e Mehshar में नबी मुहम्मद ﷺ की आवाज़

इसी हंगामे में जब हर मर्द – औरत कह रहा होगा नफ़्सी नफ़्सी एक आवाज़ उभरेगी उम्मती उम्मती एक दुःख भरी एक दर्द भरी आवाज़ आएगी या रब्बे उम्मती उम्मती!
सुनने वाले लोग हैरान होंगे कि ये कौन है? जो अपने आप को नही माँग रहा है अपनी उम्मत को माँग रहा है जब आवाज़ की तरफ नज़रे लगेंगी तो लोग देखेंगे ये तो सरकार ए दो जहां मुहम्मद रसूलुल्लाह ﷺ है झोली फैली हुई है हाथ उठे हुए हैं या रब मेरी उम्मत!
कौनसी उम्मत जो सारी ज़िंदगी शराब बेचते रहे, कौनसी उम्मत सारी जिंदगी ड्रग्स बेचते रहे, कौनसी उम्मत सारी जिंदगी सारी जिंदगी जिनाह करते रहे, कौनसी उम्मत सारी जिंदगी ज़ुल्मओ सितम के पहाड़ तोड़ते रहे और सारी जिंदगी जुआ खेलते रहे! आप तो कहते दफा हो जाओ मेरी नज़रों के सामने से न तुम्हे मेरी इज़्ज़त का खयाल रहा न मेरी नस्ल की क़ुर्बानियों का, मेरे मासूम बच्चे नैज़ों पर चढ़ गए इस दीन के लिए तुम क्या चंद पौण्डों पर जुल्म उठाके आये हो दफा हो जाओ मेरी नज़रों के सामने से यह कहने का हुक्म था पर में कुर्बान जाऊँ उस नबी ए रहमत पर हम कहाँ से अल्फ़ाज़ लाए आपकी तारीफ के लिए
दो हस्तियों के हक़ अदा नही हो सकता एक अल्लाह और एक उसका रसूल बाकी सब का हक़ अदा हो सकता है अल्लाह और उसके रसूल का हक़ नही अदा हो सकता।
वो कहते या अल्लाह इन्हें आग में डाल दे ना इन्होंने मेरा घर देखा, न इन्होंने मेरा रातों का जागना देखा, न इन्होंने मेरी कुर्बानियां देखीं, न ओहद में टूटे दाँत देखे, न तायफ़ में बिखरा खून देखा, न मेरा रोना देखा, न कर्बला में मेरे बच्चों की कुर्बानिया देखी
आपके लिए मिम्बर आएगा अल्लाह फरमाएगा मेरे हबीब बैठो आप नही बैठेंगे सिर्फ उसके मिम्बर पर हाथ रखकर खड़े हो जाएंगे कहीं ये मुझे लेकर जन्नत में न चला जाये में ऐसे नही जाऊंगा अपनी उम्मत का आखरी हिसाब करवाकर ही जाऊंगा

और यह वाक़या नए साल यानी मुहर्रम के दिनों में ही होता है इससे यह पता चलता है कि नया साल खुशियां मनाने के लिए नही बल्कि नया साल आख़िरत की तैयारियां करने ले लिए होता है नए साल से यह पता चलता है कि एक साल और निकल गया हमने अब तक अल्लाह को राज़ी किया या नही, तौबा की या नही?
आप तो कह रहें हैं या रब्बे उम्मती उम्मती फिर आप कहेंगे इनका हिसाब में लूंगा अल्लाह कहेगा आप क्यों लेंगे तो आप कहेंगे कि इन्हें इनके गुनाह की वजह से शर्मिंदा न होना पड़े तो अल्लाह कहेगा फिर इन्हें आप से भी तो शर्म आएगी नही में आपको भी नही दूंगा में इनका हिसाब पर्दे के पीछे करूँगा।

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