Haq-e-mehar का बयान – हक ए मेहेर

Haq-e-mehar का बयान - हक ए मेहेर

Haq-e-mehar का तअय्युन

यह वाज़िब है और हर औरत का हक है शौहर की हैसियत के मुताबक Haq-e-mehar मुताययुन हो
जमाना ए नबवी में कुछ लोगों ने हक ए मेहेर में खजूरों का पूरा बगीचा भी रखा है और कुछ लोगों ने बहुत कम हक ए मेहेर भी रखा है यह शौहर की हैसियत के मुताबिक होगा लोग इसमे भी अफरातो तफरी का शिकार हो जाते हैं लोग नुमाइश के लिए ज्यादा हक मेहेर रख लेते हैं जिसको फिर अदा नही कर पाते और कुछ लोग यह भी नियत रखते हैं कि जब वो हमारी बीवी बन जाएगी तो हम हक मेहेर दे या न दे कोई फर्क नही पड़ता।

फरमाया गया कि जो हक ए मेहेर के तअय्युन के वक़्त जो यह नियत करता है कि में हक ए मेहेर अदा नही करूँगा तो वह ‘बदकार’ है
तो हक ए मेहेर हक ए बुदा है यह अदा करना ही होता है यह शौहर के जिम्मे कर्ज़ है अगर वो अदा नही कर पाया तो उसके जिम्मे उधार है जब औरत चाहे मुतालबा करके उससे वह हक अदा कर सकती है और उस पर उसे नाराज़ होने की जरूरत भी नही है
तो न तो Haq-e-mehar इतना रखना चाहिए कि जिसको अदा न किया जा सके दूसरा इसका रुख यह है कि कम से कम हक ए मेहेर रखा जाता है आजकल वो शरी लिख लो शरी कितना होता है किसी जमाने 32 रुपये 10 आने कहते थे और आज कहते हैं 5000 रुपये लिख लो
बेटी वाला बेचारा बोलता नही है चाहे वो मसला ए शरी जनता ही क्यों न हो वो डरता है कि यह मेरी बेटी के सामने न आए तो यह ज्यादती नही है आपका बच्चा स्कूल/कॉलेज में पढ़ता है तो 5000 रुपये तो उसको आप दें तो वो एक महीने का खर्चा 5000 रुपये नही लेता और यह औरत अपने आप को तुम्हारे सुपुर्द कर रही है और यह इसका हक ए बुदा है इसने खुद मुताययन नही किया यह हक इसको इसके रब ने दिया है और तुम 5000 रुपये देते हो हैसियत तुम्हारी देखो

तो यह बात ज़ेहन में रखिये की जो Haq-e-mehar है और हक ए बुदा है ये औरत का हक है और यह रब ने मुकर्रर किया है और यह वाज़िब है जो अदा करना हो वह रखना चाहिए नुमाइश के लिए नही की बाद में वो हमारी बीवी होगी हम दे न दे! नही ऐसा नही है हो सके तो उधार भी किया जा सकता है या औरत चाहे तो उसे माफ भी कर सकती है लेकिन उसको मजबूर नही किया जाएगा लेकिन शौहर की हैसीयत के मुताबिक ही हक ए मेहेर रखा जाए।

Haq-e-mehar कौन तय कर सकता है

हक ए मेहेर लड़की(दुल्हन) का हक़ है यह लड़की तय कर सकती है या फिर वह अपने वालिद के जरिये बोल सकती है या उसका वालिद बोल सकता है अगर वालिद नही है तो उसके दादा, चाचा, भाई कोई भी बोल सकता है लड़का(दूल्हा) भी अपनी और से कुछ बोल सकता है जैसे लड़की 10,000 बोलती है और लड़का चाहे की में 20,000 देना चाहता हूँ तो वह बोल सकता है
अगर लड़का लड़की की चाहत से कम मेहेर देना चाहे तो वो लड़की के कहने पर ही दे सकता है

Haq-e-mehar कब दें?

हक ए मेहेर निकाह से पहले देना सुन्नत है इसके अलावा मेहेर किस्तों में या उधार भी दिया जा सकता है

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