Dua karne ka tarika -Allah se dua mangna

dua karne ka tarika

दुआ क्या है – Dua karne ka tarika

दुआ एक कैफियत का नाम है ये जो लोग कहते हैं मेरे लिए खास दुआ करो जरूर एक दूसरे के लिए दुआ करो और एक दूसरे को दुआ की दरख्वास्त भी करो।

एक बार हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु उमराह पर जा रहे थे के या रसूलल्लाह में उमराह पर जा रहा हूँ तो आप ने फरमाया उमर मुझे भी दुआओं में याद रखना।
तो एक दूसरे को दुआओं की दरख्वास्त करना यह मसलूम है वो जो कहते है न कि मेरे लिए खास दुआ करें। खास दुआ वह होती है जो आप अपने लिए तड़प के करते हैं

मिसाल के तौर पर मेरे पेट में दर्द है और में अपनी बेगम से कहता हूं तू हाय हाय कर या फिर मेरी बेगम के पेट में दर्द हो और वह कहे आप थोड़ी हाय हाय करें तो हम हाय हाय तो कर लेंगे लेकिन उसमें कैफियत तो नही होगी।
खास दुआ वो होती है जो तड़प के मांगी जाती है सीधी जाकर कबूल होती है
आमतौर पर हम कहते हैं हमारी दुआ नही सुनता यह नही कहना चाहिए अल्लाह सबकी दुआएं सुनता है हाँ कबूलियत की शक्लें अलग है कभी वही चीज दे देता हैं, कभी हमारे मुनासिब नही होती तो कोई और चीज दे देता है, कभी उसके बदले में कोई मुसीबत टाल देता है, कभी उसको स्टोर कर लेता है

और आखिरत में जब बंदा-बन्दी आएंगे न तो अल्लाह फरमाएगा तुमने यह दुआ मांगी हमने पूरी कर दी, यह दुआ मांगी उसके बदले में यह दे दिया, यह दुआ मांगी उसके बदले में यह मुसिबत टाल दी, यह दुआ मांगी इसके बदले में हमने कुछ नही दिया अब हम तुम्हे देते हैं जब वह देखेगा इस दुआ के बदले में अल्लाह के इनाम तो वह कहेगा हाय काश मेरी दुनिया में कोई दुआ कबूल न होती सबकुछ मुझे यहीं मिलता।

लेकिन बहरेहाल यहाँ भी अल्लाह से हमे लेना है वहाँ भी लेना है अल्लाह से अकेले में गुफ्तगू किया करें ये जो हम फर्ज नमाज़ के बाद दुआ करते हैं यह तो छोटी सी होती है आप अकेले में अल्लाह से दुआ करें ऐसे दुआ करें जैसे अल्लाह सामने ही है Dua karne ka tarika अक्सर हमम से बहुत सेे लोगों को पता नहीं होता है अल्लाह से रो रोकर दुआ करें अपना दुखड़ा सुनाएं क्योंकि अल्लाह 70 माओं से ज्यादा प्यार करने वाला है

वो काम जो दुआ में नही करना चाहिए

  1. दुआ शेर शायरी और पुर तककलुफ अल्फाज़ पढ़ना मना है
  2. दुआ में गैर जरूरी बातें करना मना है
  3. दुनिया में ही सजा माँगने की दुआ करना मना है
  4. अपने आपको, अपने खादिमों, अपने माल के लिए बद्दुआ करना मना है
  5. मौत की दुआ करना दुरुस्त नहीं है

दुआ कब जल्दी कबूल होती है

  1. रात के आखरी हिस्से में दुआ जल्दी कबूल होती है
  2. अजान और इखामत के दरमियान
  3. सजदे में
  4. जुम्मा के दिन असर और मगरिब के बीच
  5. बारिश नाजिल होने पर
  6. 9 जिल्हिज्जाह को अरफाह के दिन हाजियों की दुआ कबूल होती है
  7. तौबा करने वाले कि दुआ दिन और रात कबूल होती है

One Comment on “Dua karne ka tarika -Allah se dua mangna”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *