Bait ul Mamoor क्या है? और कहाँ मौजूद है

Bait ul Mamoor क्या है? और कहाँ मौजूद है

Bait ul Mamoor क्या है?

एक रिवायत में आता है कि जब सातवें आसमान पर जब अल्लाह के रसूल सल्लाहो अलैहि वसल्लम जब इब्राहिम अलैहिस्सलाम से मिले तो वह बैठे हुए थे और जिस जगह इब्राहिम अलैहिस्सलाम सातवें आसमान पर रहते हैं उस जगह पर एक अल्लाह का घर भी है जिसे बैत उल मामूर (Bait ul Mamoor) कहते हैं।
जिस तरह से काबा दुनिया में अल्लाह का घर है उसी तरह से काबे की सीध में सातवे आसमान पर भी एक किबला जो बैत उल मामूर है

तो आपने फरमाया जहाँ इब्राहिम अलैहिस्सलाम रहते हैं वहाँ एक घर है जैसे कि दुनिया में काबा है और फरिश्ते उसका तवाफ करते थे और एक वक्त में 70 हज़ार फरिश्ते उसका तवाफ करते थे और उसके बाद जब निकल जाते थे तो कयामत तक उनकी दूसरी बारी नही आने वाली

मतलब फरिश्तों की तादाद इतनी है कि एक बार अगर तवाफ कर ले तो कयामत तक उन्हें दूसरा मौका नही मिलेगा।
और आप फरमाते हैं कि बैत उल मामूर के बीच में एक दरवाज़ा था जो एक ओर से दूसरी ओर ले जाता था और फरिश्ते तवाफ के साथ-साथ उसके अंदर से भी निकलते थे

आप सल्लाहो अलैहि वसल्लम फरमाते हैं काश आइशा तेरी कौम (कुरैश) का नया ईमान लाने का मुझे डर नही होता तो में भी काबे को वैसा ही कर देता जैसा बैत उल मामूर है दरवाजे को निचे बना देता (अभी जो खाना ए काबा का दरवाजा है वह 7-8 फ़ीट की ऊंचाई पर है) जो मुशरीक़ीन ने ऊपर कर दिया था क्योंकि वो कहते थे कि कोई आम आदमी इसमें नही जाएगा सिर्फ हम ही जायेंगे।
आपने फरमाया आइशा अगर तेरी कौम ईमान लाने वाली नही होती तो में खाना ए काबा के दोनों दरवाजों को नीचे ले आता और लोग उसमे भीे एक तरफ से घुसते और दूसरी तरफ से निकलते तो तवाफ के अलावा उसमे जाने की भी इजाज़त होती
सुनान निसाई, हदीस न. 2903

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